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प्रो. समीर कुमार पाठक एवं डॉ. अस्मिता तिवारी को मिला श्री राधाचरण गोस्वामी रचनावली के सम्पादन का दायित्व

 


वाराणसी. हिंदी विभाग, डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज, वाराणसी के प्रो. समीर कुमार पाठक और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अस्मिता तिवारी जी को वृन्दावन शोध संस्थान ने भारतेन्दु युग के क्रान्तिकारी लेखक राधाचरण गोस्वामी जी की ग्रन्थावली सम्पादन का महत्त्वपूर्ण दायित्व सौंपा है। राष्ट्रीय आन्दोलन के सूत्रधार लेखक राधाचरण गोस्वामी की अभी तक बिखरी रचनाएँ साहित्य अनुसंधान से ओझल हैं। अभी तक उनके रचना संकलन व संपादन को लेकर कोई मुकम्मल गवेषणात्मक कार्य नहीं हुआ है। ऐसे में वृन्दावन शोध संस्थान की इस योजना का उद्देश्य श्री राधाचरण गोस्वामी की समस्त रचनाओं का संकलन, संपादन एवं आलोचनात्मक अध्ययन करके, रचनाओं का वर्गीकरण करके विषय एवं विधा के अनुसार विभिन्न खण्डों में उनकी रचनाओं का चयन-संकलन करना है, ताकि अकादमिक अध्ययन अनुसंधान हेतु कालक्रमानुसार राधाचरण गोस्वामी की रचनाओं की प्रामाणिक और क्रमागत रचना-यात्रा के साथ-साथ उनकी साहित्य चेतना और वैचारिक विकास यात्रा का समुचित मूल्यांकन किया जा सके।

श्री राधाचरण गोस्वामी की रचनाओं का विखंडित स्वरूप और निश्चित निर्धारित रचना विवरणी की अनुपलब्धता व प्रामाणिक पाठ के अभाव को देखते हुए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के उपक्रम वृन्दावन शोध संस्थान, वृन्दावन ने इस जरूरी दायित्व को पूरा करने का संकल्प लिया है और काशी में भारतेन्दु युग पर शोध कार्य करने वाले प्रो. समीर कुमार पाठक और डॉ. अस्मिता तिवारी को राधाचरण गोस्वामी रचनावली के संपादन का दायित्व दिया है। प्रो. समीर कुमार पाठक और डॉ. अस्मिता तिवारी डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज हिंदी विभाग में प्राध्यापक हैं और भारतेंदुयुगीन साहित्य के गंभीर अध्येता हैं। उनके द्वारा लिखित बालकृष्ण भट्ट पर उ. प्र. हिंदी संस्थान, लखनऊ से प्रकाशित मोनोग्राफ विशेष चर्चा में था। इसके साथ ही समीर कुमार पाठक ने 2015 में भारतेन्दु युग के क्रान्तिकारी पत्रकार व लेखक बालकृष्ण भट्ट की रचनावली का चार खण्डों में संपादन भी किया है। उनकी मदनमोहन मालवीय और मौलाना अबुल कलाम आजाद पर किताब नेशनल बुक ट्रष्ट, नई दिल्ली से प्रकाशित है। उन्होंने रमेशचन्द्र दत्त, रामप्रसाद बिस्मिल और कवि परसन के दस्तावेजों के संकलन और संपादन में सक्रिय भूमिका भी निभाई थी। अभी हाल ही में साहित्य अकादमी से राधामोहन गोकुल पर उनका विनिबंध (मोनोग्राफ) प्रकाशित हुआ है। प्रो. पाठक लम्बे समय से हिंदी प्रदेश के नवजागरण से संबंधित दुर्लभ सामग्री पर गंभीर शोध कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वह सरदार पूर्ण सिंह की दुर्लभ रचनाओं को नेशनल बुक ट्रस्ट के लिए संकलित संपादित कर रहे हैं।

प्रो. समीर कुमार पाठक ने वृन्दावन शोध संस्थान के प्रस्ताव के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतेन्दु युग और हिंदी प्रदेश का नवजागरण हमारे निकटतम अतीत का बुलंद दरवाजा है, जिसके माध्यम से हिंदी साहित्यकारों के सरोकार और संकल्प को समझा जा सकता है। दरअसल, हिंदी प्रदेश के नवजागरण के बारे में अभी भी मूल स्रोत सामग्री का अभाव उसके समग्र मूल्यांकन की एक बड़ी समस्या है। इसका वास्तविक कारण बहुत सारे लेखकों की समग्र रचनाओं का काल-क्रमानुसार और विषयवार उपलब्ध न होना भी है। महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी, बापूदेव शास्त्री, सुमेरु सिंह साहबजादे, अंबिकादत्त व्यास, नकछेदराम तिवारी, ज्वालादत्त शर्मा, राधाकांत मिश्र, अध्यापक पूर्ण सिंह, माधवप्रसाद मिश्र, श्रद्धाराम फुल्लौरी, चंद्रशेखरधर मिश्र, जनकवि परसन, काशीप्रसाद जायसवाल, साहिब प्रसाद सिंह, पं. दामोदर शास्त्री, सांवलदास नागर और भूदेव मुखोपाध्याय जैसे लेखकों-विचारकों की रचनात्मक सांस्कृतिक उपलब्धियों का कोई लेखा-जोखा हिंदी में अब तक नहीं है। ऐसे बहुत सारे सैकड़ों नाम हैं, जिनकी रचनाओं के प्रतिनिधि संकलन भी उपलब्ध नहीं हैं। इस कड़ी में राधाचरण गोस्वामी की रचनात्मक थाती भी हिंदी में अनुपलब्ध है। इस तरह के जरूरी और खोजपूर्ण कार्यक्रमों की कोई पहल भी हिंदी समाज में दिखाई नहीं पड़ रही है। इस घनघोर विस्मरण के दौर में वृन्दावन के शीर्ष स्थानीय प्रतिभा पुरुष और भारतेन्दु युग के महान रचनाकार श्री राधाचरण गोस्वामी की साहित्यिक सांस्कृतिक विशिष्टता और जनपदीय उपलब्धियों का व्यवस्थित मूल्यांकन की दिशा में वृन्दावन शोध संस्थान की यह पहल सराहनीय है और इसके लिए संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी और संस्थान के समस्त न्यासी बधाई के पात्र हैं।

इस महत्त्वपूर्ण शोध-कार्य में संस्थान ने डॉ. अस्मिता तिवारी को सम्पादन सहयोगी के रूप में नामित किया है और संकलन की जिम्मेदारी दी है। डॉ. अस्मिता तिवारी ने हिंदी नवजागरण के महत्त्वपूर्ण लेखक बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' पर शोध कार्य किया है और हिंदी प्रदेश की पहली महिला लेखिका राजेन्द्रबाला घोष (बंगमहिला) की रचनावली का संपादन भी किया है। डॉ. अस्मिता तिवारी ने बताया कि इस दायित्व के लिए वृन्दावन शोध संस्थान के प्रति आभारी हूँ। यह गंभीर कार्य है और चुनौतीपूर्ण भी। यह कार्य राधाचरण गोस्वामी की समस्त उपलब्ध रचनाओं का संकलन करना भर नहीं है, बल्कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त उनकी रचनाओं के पाठ का आलोचनात्मक संपादन, विधागत एवं विषयगत वर्गीकरण और साहित्य पाठ में निहित धार्मिक, सामाजिक एवं दार्शनिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना भी है। उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश होगी कि इस रचनावली के साथ-साथ उनके योगदान का भी पुनर्मूल्यांकन हो और साथ ही एक मानक रचनावली का निर्माण एवं प्रकाशन हो।

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