बरेली कॉलेज में ''भारतीय भाषाओं में ज्ञान परंपरा'' विषय पर होगी राष्ट्रीय संगोष्ठी
🌼 राष्ट्रीय संगोष्ठी में सहभागिता हेतु आमंत्रण 🌼
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, दिल्ली एवं हिंदी विभाग, बरेली कॉलेज, बरेली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित
🎓 राष्ट्रीय संगोष्ठी (ऑनलाइन / ऑफलाइन)
📚 विषय: “भारतीय भाषाओं में ज्ञान परंपरा”
📅 तिथि: 1 – 2 मई, 2026
📍 स्थान: सभागार, बरेली कॉलेज, बरेली
🔹 संगोष्ठी के प्रमुख उप-विषय
• भारतीय भाषाएँ और ज्ञान परंपरा का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
• प्राचीन ग्रंथों में ज्ञान एवं ज्ञान-संरक्षण परंपरा
• वेद, उपनिषद तथा अन्य शास्त्रों की भाषाई भूमिका
• पाली, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं में ज्ञान परंपरा
• लोकभाषाओं में ज्ञान परंपरा और जीवन-दर्शन
• अनुवाद परंपरा और ज्ञान के प्रसार में उसका योगदान
• भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) और भाषाई विमर्श
• आयुर्वेद, गणित, ज्योतिष, वास्तु आदि ग्रंथों की भाषाई व्याख्या
• आधुनिक शिक्षा और भारतीय भाषाएँ (NEP-2020 के संदर्भ में)
• उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं के माध्यम से ज्ञान-सृजन
• साहित्य और संस्कृति में भारतीय ज्ञान परंपरा
• भारतीय भाषाओं में नैतिक एवं मानवीय मूल्य
• अनुवाद, अंतर्भाषीय संवाद और सांस्कृतिक समन्वय
• पर्यावरण, कृषि एवं पारंपरिक भारतीय ज्ञान
• स्थानीय भाषाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास
• अन्य संबंधित विषय
📌 महत्वपूर्ण तिथियाँ
📝 शोध पत्र प्राप्ति की अंतिम तिथि: 10 अप्रैल 2026
📋 पंजीकरण की अंतिम तिथि: 20 अप्रैल 2026
📧 शोध पत्र भेजने हेतु ईमेल:
seminarbcb@gmail.com
💳 पंजीकरण शुल्क
👨🏫 प्राध्यापक – ₹700
🎓 शोध छात्र – ₹500
👩🎓 स्नातक / स्नातकोत्तर छात्र – ₹300
📲 पंजीकरण प्रक्रिया
1️⃣ WhatsApp Group में जुड़ने के लिए –
https://chat.whatsapp.com/IytJspKgHqAGTubp7Cvc3m?mode=gi_t
2️⃣ पंजीकरण शुल्क भुगतान हेतु –
pa=9411009012@ibl&pn=MANU%20%20PRATAP
3️⃣ पंजीकरण पूर्ण करने के लिए –
https://forms.gle/pLsUhU5Nd5khurqZA
⚠️ कृपया शुल्क भुगतान के पश्चात Google Form अवश्य भरें।
📞 संपर्क
संयोजक: प्रो. परमजीत कौर – 9411916785
आयोजक सचिव: प्रो. मनुप्रताप – 9411009012
🏛 हिंदी विभाग, बरेली कॉलेज, बरेली
✨ आप सभी विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में सहभागिता हेतु हार्दिक आमंत्रण। ✨
नोट – प्राप्त शोध पत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की योजना है।








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