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दुनिया की सबसे अच्छी और सबसे सच्ची प्यार की परिभाषा क्या है?


1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
4 प्रेम धीरजवन्त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
6 कुकर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है।
7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
Bible, New Testament, 1 Corinthians 13




If I speak with the tongues of men and of angels, but have not love, I am become sounding brass, or a clanging cymbal. 2 And if I have the gift of prophecy, and know all mysteries and all knowledge; and if I have all faith, so as to remove mountains, but have not love, I am nothing. 3 And if I bestow all my goods to feed the poor, and if I give my body to be burned, but have not love, it profiteth me nothing. 4 Love suffereth long, and is kind; love envieth not; love vaunteth not itself, is not puffed up, 5 doth not behave itself unseemly, seeketh not its own, is not provoked, taketh not account of evil; 6 rejoiceth not in unrighteousness, but rejoiceth with the truth; 7 beareth all things, believeth all things, hopeth allnot loue, I were nothing. 3 And though I feede the poore with all my goods, and though I giue my body, that I be burned, and haue not loue, it profiteth me nothing. 4 Loue suffreth long: it is bountifull: loue enuieth not: loue doeth not boast it selfe: it is not puffed vp: 5 It doeth no vncomely thing: it seeketh not her owne things: it is not prouoked to anger: it thinketh not euill: 6 It reioyceth not in iniquitie, but reioyceth in the trueth: 7 It suffreth all things: it beleeueth all things: it hopeth all things: it endureth all things. 8 Loue doeth neuer fall away, though that prophecyings be abolished, or the tongues cease, or knowledge vanish away. 9 For we knowe in part, and we prophecie in part. 10 But when that which is perfect, is come, then that which is in part, shalbe abolished.

Bible, New Testament, 1 Corinthians 13




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