राजनीति

[राजनीति][twocolumns]

समाज

[समाज][bleft]

साहित्‍य

[साहित्‍य][twocolumns]

सिनेमा

[सिनेमा][grids]

भारत का राष्ट्रीय दोष क्या है?


भाई सारे दुर्गुण चले जाते हैं, पर वह अभागी ईर्ष्या नहीं जाती...। यही हमारा राष्ट्रीय दोष है-परनिंदा और दूसरों की महानता से जलना। केवल हम ही बड़े हो, दूसरा कोई बड़ा ना हो सके। 
-स्वामी विवेकानंद, शिकागो, 19 मार्च, 1894



Post A Comment
  • Blogger Comment using Blogger
  • Facebook Comment using Facebook
  • Disqus Comment using Disqus

No comments :