राजनीति

[राजनीति][twocolumns]

समाज

[समाज][bleft]

साहित्‍य

[साहित्‍य][twocolumns]

सिनेमा

[सिनेमा][grids]

सामाजिक न्याय के योद्धाओं का दिल्ली में हुआ महासम्मेलन

कार्यक्रम का फ़ोटो
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व मंडल कमीशन के अध्यक्ष श्री बी पी मंडल के 100 वीं अर्थात जन्म शताब्दी वर्ष के मौके पर पीआईएल फाउंडेशन ने कांस्टीटूशन क्लब ऑफ इंडिया, रफी मार्ग, दिल्ली में 19 अगस्त को "सामाजिक न्याय दिवस" के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाया तथा "बहुसंख्यक समाज की वंचितता, प्रतिनिधित्व विहीन व्यवस्था और सरकार की उदासीनता" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। वहीं पीआईएल फाउंडेशन अपने माँग पत्र के साथ बी पी मंडल के जन्मदिन 25 अगस्त को ‘सामाजिक न्याय दिवस’ घोषित करने की माँग पुरानी मांग को दोहराता हुआ नज़र आया।

 देश की आधी से ज्यादा आबादी OBC के वास्तविक हालात को पहचानने और अधिकार दिलाने वाले BP मंडल की जयंती 25 अगस्त को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है। इस मौके पर जगह-जगह आयोजन किए जा रहे हैं।

पिछड़ों के अधिकारों के लिए मुखर रहे तमाम आवाजों को एकजुट करके किए जा रहे इन आयोजनों की दस्तक ने मोदी सरकार को सकते में डाल दिया है कि देश की इतनी बड़ी आबादी का भरोसा टूटा तो सत्ता में दोबारा वापसी नामुमकिन हो जाएगी।

बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके बी पी मंडल की अध्यक्षता में बनाई गई रिपोर्ट को ही ‘मंडल कमीशन’ के नाम से जाना जाता है, जिसके अंश मात्र के लागू करने की वजह से देश में ओबीसी आरक्षण संभव हो सका है। हालांकि उनकी रिपोर्ट बृहद है जो सिर्फ OBC आरक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि पिछड़ों के सामाजिक और आर्थिक हालात से अवगत कराती हुई बड़ी सुधार का रोडमैप सुझाती है।

इन्हीं मुद्दों पर चर्चा करने के लिए देशभर में अलग-अलग आयोजन किए जा रहे हैं।     

                                        

इसी कड़ी में रविवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित प्रोग्राम में बी पी मंडल के योगदान और पिछड़े समाज के हालात पर जमकर चर्चा हुई। पीआईएल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस प्रोग्राम की सबसे बड़ी खूबी थी कि चर्चा का दायरा बड़ा रखा गया। राजनेताओं के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं, जजों , शिक्षाविदों और मीडियाकर्मियों के संबोधन के जारिए पिछड़े समाज के सभी पहलुओं पर चर्चा करने की कोशिश की गई।

जहां राजनेताओं में पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी और वर्तमान लोकसभा सांसद पप्पू यादव और उदित राज मौजूद थे वहीँ सामाजिक कार्यकर्ताओं में चंद्रपाल सिंह, सिकंदर यादव पूर्व आईएएस गोरेलाल यादव शामिल हुए। न्यायपालिका में पिछड़ों के हालत पर चर्चा के लिए पूर्व न्यायधीश एस आर सिंह और अधिवक्तागण की मौजूदगी रही। सामाजिक न्याय की बात रखने के लिए वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली और नवीन कुमार मौजूद रहे। इसके साथ ही वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पिछड़ों के हितों पर चर्चा करने के लिए प्रोफेशर रतनलाल मौजूद रहे।

बसपा के पूर्व सांसद बलिहारी बाबू की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज एस आर सिंह रहे।

पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी ने जातिगत जनगणना पर जोर देते हुए कहा कि जब तक सही संख्या का पता नहीं चलेगा तब तक लोगों की हिस्सेदारी को कैसे सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके साथ ही वर्तमान सरकार पर आक्रामक होते हुए अली अनवर अंसारी ने बहुजनों के एकता की बात की।

उन्होंने कहा- इस  देश का मुसलमान खुद को अल्पसंख्यक क्यों मानता है? वह इस देश में बहुजनों के साथ मिलकर बहुसंख्यक आबादी बनाता है, वह इस देश का मूल निवासी है। अब मुसलमानों को कहना शुरू कर देना चाहिए कि वह बहुजन हैं, इस देश के मूल निवासी हैं और इस देश की सबसे बड़ी आबादी होने के नाते बहुजनों का अधिकार सबसे ज्यादा है।                             
                                             

कार्यक्रम में सत्ताधारी दल से लोकसभा सांसद उदित राज को भी संबोधित करने के लिए बुलाया गया था हालाँकि मुलायम सिंह को आरक्षण विरोधी बताते हुए वह श्रोताओं से उलझ गए और विवाद की स्थिति में बिना कोई ठोस बात रखे हुए चले गए।

उनकी तमाम बातों का सार यही था कि दलित-पिछड़ों की राजनीति करने वाले नेताओं ने दलित-पिछड़ों के लिए कुछ नहीं किया। वैसे भाजपा जैसी पार्टियों ने बहुजनों के लिए क्या किया है, इसका भी उनके पास जवाब नहीं था।

दलित-पिछड़ों के नेताओं के प्रयास को नाकाफी मानते हुए सांसद पप्पू यादव ने कहा कि ‘पिछड़ों को चौतरफा ठगा जा रहा है इसलिए अब बात करने की नहीं काम करने का वक्त आ गया है। पिछड़ों के हित की बात करने वाले नेताओं को अब प्रैक्टिकल हो जाना चाहिए सिर्फ सैद्धांतिक बातें  करने से कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।’

हालांकि दलित-पिछड़े नेताओं के प्रति एक उम्मीद जगाते हुए प्रोफेसर रतनलाल ने कहा ‘अब जब अखिलेश यादव को शूद्रता का अहसास हो गया है और मायावती के साथ मिलकर दलित-पिछड़ों का एक बड़ा फ्रंट खड़ा करना चाहते हैं तो इसमें किसी को नाराजगी क्यों है। बहुजनों की एकता लोगों से देखी नहीं जा रही है क्या।’

पिछड़े समाज के वर्तमान हालात पर मीडिया की तरफ से भी कुछ आवाजें बुलंद हुई। वरिष्ठ पत्रकार कुर्बान अली के संबोधन के बाद पत्रकार नवीन कुमार ने तमाम मुद्दे उठाए।   


उन्होंने कहा- ‘पिछड़े समाज के छात्रों को विश्वविद्यालय में पढ़ने से रोका जा रहा है। प्राइवेट संस्थानों को बढ़ावा देकर जातिवादी लोगों को आगे किया जा रहा है। इसके साथ ही भागीदारी का सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में पिछड़ों को भागीदारी ना देकर ये सरकारें सिर्फ और सिर्फ ठग रही हैं।  इसलिए अब बहुजनों की जिम्मेदारी है कि अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।’

कार्यक्रम के आयोजक PIL फाउंडेशन के चेयरमैन संतोष कुमार और उनके सहयोगी रवि कुमार, गौरव यादव, रिज़वान रज़ा, रीना यादव, चन्दन कुमार और प्रवीण यादव से बात करने पर कार्यक्रम के विजन का पता चला। उन्होंने कहा ‘कार्यक्रम का उद्देश्य यही था कि पिछड़े समाज की आवाज बुलंद करने वाले तमाम राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और शिक्षाविद देश की राजधानी में एकजुट हो सकें। बी पी मंडल की 100वीं जयंती पर केंद्र सरकार से मांग की जाती है कि इसे ‘सामाजिक न्याय दिवस’ घोषित किया जाए। ताकि आने वाली पीढ़ियों को पता चल सके की बी पी मंडल का योगदान क्या है और पिछड़े समाज के हक की बात करने वाली बी पी मंडल इस देश के लिए ‘भारत रत्न’ क्यों हैं।     
                        
                                                                                            
इस अवसर पर सुधेश यादव, अध्यक्ष ifycc, विजेंद्र यादव, अध्यक्ष यदुवंशी महासभा, सनोबर अली कुरैशी, जाहिद, अम्बिका राय, विजेंद्र कसना, अधिवक्ता, फ्रैंक हुज़ूर, महेंद्र यादव पत्रकार, सुधीर यादव नेता भाजपा, सतेंद्र पी एस पत्रकार लेखक आदि आये। इनके साथ ही जवाहर लाल नेहरू और दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र बड़ी संख्या में कार्यक्रम के अंत तक मौजूद रहे।