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बी पी मंडल के जन्मदिन को सामाजिक न्याय दिवस घोषित करने की माँग पकड़ने लगा जोर


बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व मंडल कमिशन के अध्यक्ष बी पी मंडल के जन्मदिन 25 अगस्त को सामाजिक न्याय दिवस घोषित करने की माँग सोशल मीडिया पर जोर पकड़ने लगी है। वे राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े कार्यकर्त्ता के रूप में देख जाते हैं.



बी पी मंडल के 99वें जन्मदिन पर पीआईएल फाउंडेशन ने दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित कर अपने माँग पत्र के साथ बी पी मंडल के जन्मदिन 25 अगस्त को ‘सामाजिक न्याय दिवस’ घोषित करने की माँग की थी। जहाँ पीआईएल फाउंडेशन अपनी पुरानी माँग को दोहराता हुआ नज़र आ रहा है तो वहीं यह सोशल मीडिया पर यह माँग जोर पकड़ता जा रहा है। विभिन्न लोगों ने अपनी वाल पर पीआईएल फाउंडेशन की माँग पत्र वाली बी पी मंडल के फोटों को शेयर किया है तथा पीआईएल फाउंडेशन की माँग को दोहराया है।



वहीँ पीआईएल फाउंडेशन के चेयरमैन संतोष के. यादव ने अपने एक पोस्ट में लिखा है कि सामाजिक न्याय के योद्धाओ का महाकुंभ 19 अगस्त, 2018 को दिल्ली में होगा.
स्थान: कांस्टीट्यूशन क्लब दिल्ली। समय: 1 बजे।
आप सादर आमंत्रित।
समाजिक न्याय के चिंतक, मार्गदर्शक समर्थक और नेतृत्वकर्ताओ द्वारा आयोजित।
इससे लगता है कि पीआईएल फाउंडेशन ने पहले से ही कमर कस लिया है और इसकी तैयारी राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है.

कौन है बी.पी. मंडल?

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मसीहा के नाम से प्रख्यात बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल के अध्यक्ष थे जिन्होंने पिछड़ों (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण देने की वकालत की थी। 392 पृष्ठ की मंडल कमीशन की रिपोर्ट तैयार कर देश को सामाजिक-आर्थिक​ विषमता से निबटने का एक तरह से मुकम्मल दर्शन देने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी. मंडल (बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल : 25 अगस्त 1918 - 13 अप्रैल 1982) हैं। 20 दिसंबर 1978 को प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अनुच्छेद 340 के तहत नए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की घोषणा सदन में की। आयोग की विज्ञप्ति 1 जनवरी, 1979 को जारी की गई, जिसकी रिपोर्ट आयोग ने 31 दिसंबर 1980 को दी जिसे राष्ट्रपति ने अनुमोदित किया। 30 अप्रैल, 1982 में इसे सदन के पटल पर रखा गया, जो 10 वर्ष तक फिर ठंडे बस्ते में रहा। वी.पी. सिंह की सरकार ने 7 सितंबर, 1990 को सरकारी नौकरियों में पिछड़ों के लिए 27% आरक्षण लागू करने की घोषणा की। वर्षों धूल फांकने के बाद मंडल कमीशन की रिपोर्ट पर शरद यादव, रामविलास पासवान, जार्ज फर्नांडिस, मधु दंडवते, लालू प्रसाद, आदि नेताओं द्वारा सदन के अंदर लगातार धारदार बहस और सड़क पर सतत संघर्ष के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री वी पी सिंह की सरकार में इसे लागू करवाया.

मंडल आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें इस प्रकार हैं:

बीपी मंडल ने जातिवाद को ख़त्म करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे।
मंडल आयोग ने 1980 में जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी लेकिन सरकार ने उस सिफ़ारिश को लागू किया. उसमें पिछड़े वर्ग को आरक्षण की बात कही गई थी. शेष सिफ़ारिशें अभी भी लागू किए जाने की प्रतीक्षा कर रही हैं. सरकार ने अभी तक मंडल कमीशन को सिर्फ दो सिफारिशें लागू की है। बाकी 38 सिफारिशों को पिछले 25 सालों से प्रतीक्षा सूची में डाली हुई है। शायद पिछड़े वर्ग के आंदोलन करने का इंतज़ार कर रही है।

मुख्य सिफ़ारिशें


1. अनुसूचित जाति और जनजातियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में 22.5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. इसके मद्देनजर अन्य पिछड़ा वर्गों को भी सभी सरकारी नौकरियों, तकनीकी और व्यावसायिक संस्थानों में 27 फीसदी आरक्षण दिया जाए.

2. समाज की मुख्य धारा से पीछे छूट गई आबादी के सांस्कृतिक उन्नयन के लिए पिछड़े वर्गों की सघन आबादी वाले इलाकों में शिक्षा की विशेष व्यवस्था होनी चाहिए. इसमें व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए. तकनीकी और व्यावसायिक संस्थानों में आरक्षण कोटे से आए छात्रों के लिए कोचिंग की विशेष व्यवस्था की जाए.

3. ग्रामीण कामगारों के कौशल को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना चला कर उन्हें रियायती दरों पर ऋण मुहैया करना ज़रूरी है. औद्योगिक और व्यावसायिक कारोबार में पिछड़े वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वित्तीय और तनकीनी संस्थानों का नेटवर्क विकसित किया जाए.

4. आयोग ने कहा कि समाज का पिछड़ा तबका गुजर बसर करने के लिए धनी किसानों के ऊपर निर्भर है क्योंकि इस वर्ग के पास खेती के लिए बड़े भूखंड नहीं है. इसलिए देश भर में क्राँतिकारी भूमि सुधार लागू करने की ज़रूरत है.

5. पिछड़े वर्गों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम चलाने के वास्ते राज्यों को केंद्रीय सहायता की ज़रूरत है.

मंडल आयोग ने पिछड़ी जातियों, वर्गों के निर्धारण के लिए सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक मानकों के आधार पर 11 सूचकांक तय किए थे.


सामाजिक स्थित

1. वैसी जाति या वर्ग जिन्हें अन्य जाति या वर्गों द्वारा सामाजिक रूप से पिछड़ा समझा जाता है.
2. वैसी जाति या वर्ग जो आजीविका के लिए मुख्य रूप से शारीरिक श्रम पर निर्भर है.
3. वैसी जातियाँ या तबका जिनमें 17 साल से कम आयु की महिलाओं का विवाह दर ग्रामीण इलाकों में राज्य औसत से 25 प्रतिशत और शहरी इलाकों में दस प्रतिशत अधिक है और इसी आयु वर्ग में पुरुषों का विवाह दर ग्रामीण इलाकों में दस प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में पाँच प्रतिशत ज्यादा है.

शैक्षिक आधार


1. वैसी जातियाँ या वर्ग जिनमें पाँच से 15 साल की आयु वर्ग में स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या राज्य औसत से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक हो.
2. इसी आयु वर्ग में जिन जातियों या वर्गों के बच्चों के स्कूल छोड़ने का प्रतिशत राज्य औसत से कम से कम 25 प्रतिशत है.
3. वैसी जातियाँ, वर्गों जिनमें मैट्रिक परीक्षा पास करने वाले छात्र-छात्राओं का प्रतिशत राज्य औसत से 25 प्रतिशत कम है.


आर्थिक आधार


1. वैसी जातियाँ, वर्गों जिनमें औसत पारिवारिक संपत्ति मूल्य राज्य औसत से 25 प्रतिशत कम है.
2. ऐसी जातियाँ, वर्ग जिनमें कच्चे घरों में रहने वालों की संख्या राज्य औसत से कम से कम 25 प्रतिशत कम है.
3. ऐसे इलाकों में रह रही जातियाँ, वर्ग जिनमें 50 फीसदी परिवारों को पेयजल के लिए आधा किलोमीटर से दूर जाना पड़ता है.

वही अर्जुन सिंह ने 2006 में उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर मंडल को विस्तार दिया था.