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अब संघर्ष सड़क पर होगा: शरद यादव

शरद यादव की राज्य सभा से सदस्यता समाप्त किया जाना नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और नीतिश कुमार की साजिश का परिणाम. सदस्यता समाप्त करने के अलोकतांत्रिक एवं असंवैधानिक फैसले का पुरजोर विरोध किया जाना जरूरी. -जावेद रजा

भड़ूच ज़िले के झगड़िया विधान सभा क्षेत्र से बयान जारी कर जनता दल यू के राष्ट्रीय महामंत्री ने शरद यादव की राज्य सभा से सदस्यता समाप्त किए जाने के फैसले को आलोकतांत्रिक एवं असंवैधानिक फैसला बताते हुए नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को नीतिश कुमार के साथ मिलकर की गई षडयंत्र का परिणाम बताया है. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि शरद यादव कल रात जब गुजरात पहुँचे तब रात के 10:30 बजे उन्हें दिल्ली से उनकी पत्नी ने सूचित किया कि उपराष्ट्रपति कार्यालय से राज्य सभा की सदस्यता समाप्त करने की सूचना प्राप्त हुई है.




शरद यादव की उपस्थिति में आदिवासी नेता छोटू बसावा के हजारों समर्थकों को माँजीपुरा में सम्बोधित करते हुए अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि गुजरात के मतदाता शरद यादव की सदस्यता समाप्त करने का विरोध अपने मतपत्र के माध्यम से भाजपा के खिलाफ मतदान करके प्रदर्शित करेंगे. भाजपा का सफाया इस चुनाव में हो जाएगा.


अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि नरेन्द्र मोदी, अमित शाह गुजरात चुनाव में अपनी हार की स्थिति से बौखला गए हैं तथा देश में किसानों मजदूरों की आवाज को संसद में बुलंद करने वाले शरद यादव की सदस्यता समाप्त कर विपक्ष की आवाज को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। अरुण श्रीवास्तव ने लोकतंत्र धर्मनिपेक्षता, सामाजिक न्याय, समाजवाद में विश्वास रखने वाले संगठनों और व्यक्तियों से सदस्यता समाप्त करने के फैसले का पुरजोर विरोध करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि जिस संसद ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के तौर पर सम्मानित किया था. उस सदन से उनकी सदस्यता इसलिए समाप्त कर दी गई क्योकि वे अपनी ही पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रयासरत थे तथा नीतीश कुमार द्वारा जनादेश के खिलाफ भाजपा के साथ सरकार बनाने का विरोध कर रहे थे. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि सदस्यता समाप्त होने के फैसले से पार्टी के भीतर लोकतंत्र पूरी तरह से समाप्त हो गया है, जो देश के लोकतंत्र के लिए भी खतरा है, जिसका अन्देशा समाजवादी चिन्तक मधु लिमये ने संसद में इस आशय का कानून परित करते समय किया था। अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि शरद यादव स्वंय पूर्व में दो बार लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं. एक बार तब जब इंदिरा गाँधी ने आपातकाल के दौरान सदन की अवधि बढ़ाने का फैसला किया था तथा दूसरी बार जब जैन हवाला काण्ड में उनका नाम घसीटा गया था. जो व्यक्ति पहले दो बार स्वंय ही इस्तीफा दे चुका हो उसकी सदस्यता समाप्त किये जाने से उनके मनोबल पर कोई फर्क पड़ने वाला नही है. जबकि मनोबल तोड़ने के मकसद से ही उनकी राज्य सभा की सदस्यता समाप्त की गई है. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि यह सर्वविदित है कि केन्द्र सरकार शरद यादव को एन.डी.ए. में शामिल कर केन्द्रीय मंत्री बनाना चाहती थी लेकिन जब उन्होंने पार्टी के फैसले के मुताबिक विपक्षीय एकता को लेकर तथा लालू यादव और कांग्रेस के साथ जनादेश के अनुसार सरकार चलाने का आग्रह नीतिश कुमार से किया, तब उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. इसके बावजूद भी षड़यंत्रपूर्वक चुनाव आयोग के माध्यम से शरद यादव के खिलाफ फैसला कराया गया ताकि उनकी सदस्यता समाप्त की जा सके.

सभा को संबोधित करते हुए जनता दल यू के महामंत्री जावेद ने बताया कि देश भर में अक्रोशित कार्यकर्ता नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और नीतिश कुमार का पुतला दहन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी का बहुमत शरद यादव के साथ था और है. इसके बावजूद चुनाव आयोग के माध्यम से फैसला करा कर  षड़यंत्रपूर्वक शरद यादव की राज्य सभा की सदस्यता समाप्त कर दी गई.




आदिवासी नेता छोटू भाई बसावा ने कहा कि गरीबों की आवाज़ को कुचला नहीं जा सकता, गुजरात में भाजपा को हराकर हम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को सबक सिखाने का काम करेंगे. छोटू भाई बसावा के समर्थन में उमला से शुरू हुए रोड शो के बाद नेतरंग में रैली को संबोधित करते  जनतादल यू के वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने कहा कि वे नरेंद्र मोदी की एनडीए सरकार बनने के बाद से ही विपक्षी एकता बनाने के किये प्रयासरत थे तथा बिहार में व्यापक विपक्षी एकता बनाकर उन्होंने सरकार बनाने में सफलता हासिल की थी जिसे तोड़ने के लिए मोदी ने नीतीश को साधा लेकिन सांझा विरासत के माध्यम से विरोधी दलों की एकजुटता को कायम करने में मैं जुटा हुआ हूँ, जिससे घबराकर मेरे खिलाफ सदस्यता समाप्त करने की साजिश की गई है लेकिन मेरा देश को बचाने का अभियान जारी रहेगा. में जनता और लोकतंत्र की ताकत में भरोसा रखता हूँ. मेरा सघर्ष लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद की रक्षा के लिए सड़कों पर जारी रहेगा.

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू का राज्यसभा सदस्य शरद यादव एवं अली अनवर अंसारी की सदस्यता ख़त्म करने का दिनांक 4 दिसम्बर, 2017 का निर्णय संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों एवं नियमों की गलत व्याख्या कर दिया गया असंवैधानिक निर्णय है.

भारत में संवैधानिक लोकतंत्र है और संसदीय दलीय प्रणाली को मजबूत करने एवं दल बदल को रोकने के लिए संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़कर राजनैतिक दलों की भूमिका का पहली बार 1985 प्रावधान किया गयाI. उसके पश्चात 1989 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 (ए) में राजनैतिक दलों के पंजीकरण का प्रावधान किया गया. जिसमें भारत निर्वाचन आयोग राजनैतिक दलों के संविधान को  पंजीकृत करता है. साथ ही इसके पूर्व से निर्वाचन आयोग चुनाव चिन्ह आरक्षण, आवंटन नियम 1968 के अनुसार राजनैतिक दलों को चुनाव चिन्ह का आरक्षण एवं आवंटन करता है.

उल्लेखनीय है जनता दल (यूनाइटेड) के विवाद में भारत निर्वाचन आयोग ने अपने विस्तृत निर्णय 25/11/2017 में जनप्रतिनिधित्व नियम की धारा 29 (ए) के अनुसार पंजीकृत जनता दल (यूनाइटेड) संविधान के अनुसार निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता पर अपने निर्णय में कहा कि यह हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है और इस पर निर्णय पार्टी या सक्षम न्यायालय करेगा.




इसी प्रकार राज्य सभा के सभापति ने अपने निर्णय दिनांक 4-12-2017 में जनता दल (यूनाइटेड) के निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता के सवाल पर कहा की यह हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है.  संवैधानिक प्रश्न यह है कि भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्यसभा के सभापति जब संसद के बनाये हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 (ए) के अनुसार पंजीकृत राजनैतिक दल के निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता का निर्धारण उनके क्षेत्राधिकार में नहीं है फिर वे किस क्षेत्राधिकार से तथाकथित असंवैधानिक एवं फर्जी तरीके से निर्वाचित स्वयंभू पार्टी पधाधिकारियों की सूचना या याचिका के आधार संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों एवं नियमों की व्याख्या कर शरद यादव एवं अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म की और जिन तथाकथित याचिकाकर्ता राम चन्द्र प्रसाद सिंह की सदस्यता ख़त्म करना चाहिए उस पर मौन रहकर उन्हें क्यों बचा रहे हैं. 

राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू द्वारा जनता दल (यूनाइटेड) के निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता के निर्णय के पूर्व जनता दल (यू) के तथाकथित स्वयंभू प्रधान महासचिव के.सी. त्यागी एवं महासचिव राम चन्द्र प्रसाद सिंह के पत्र एवं याचिका के अनुसार शरद यादव और अली अनवर की स्वेच्छा से जनता दल (यूनाइटेड) छोड़ने की सूचना के आधार पर राज्यसभा की सदस्यता खत्म करना संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के खिलाफ असंवैधानिक निर्णय है और देश में संवैधानिक लोकतंत्र विफल होने का प्रमाण है जो देश की जनता के सामने बड़ी चुनौती है. जनता दल (यू) सभी देशवासियों से संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनप्रतिरोध शुरू करने की अपील करता है.

     -इंजी. सुनील यादव 
आई आई टी रुड़की के पूर्व छात्र