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यदि आप अभी मुट्ठी नहीं बाँधेंगे, तो आप की एक-एक अंगुली तोड़ दी जाएगी: न्यायाधीश रविन्द्र सिंह

दिल्लीI 25 अगस्त को बी पी मंडल की 99वीं जयंती पर पीआईएल फाउंडेशन द्वारा ‘बहुसंख्यकों के विकास के बिना, क्या देश का विकास संभव है?’ विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम देश की बहुसंख्यक आबादी की समस्याओं पर केन्द्रित था. कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मनोज मल्हार ने हंस के सम्पादक राजेंद्र यादव के द्वारा मंडल आन्दोलन के दौरान अक्टूबर और नवम्बर 1990 में लिखे सम्पादकीय क्रमश: ‘तुम्हारे पैर, पैर, हमारे पैर, चरण’ और ‘मेरिट का सवाल’ के संक्षिप्त पाठ से किया. इसकी चर्चा करते हुए मनोज मल्हार ने कहा कि आरक्षण वाले की योग्यता पर सवाल उठाया जाता है, लेकिन डिग्री खरीदने वाले की योग्यता पर कभी कोई सवाल नहीं उठाया जाता. 

बीएसएफ के जवान जनार्दन यादव ने कहा कि सामाजिक समरसता सिमटने लगी है. वहीं पत्रकार महेंद्र यादव ने कहा कि बहुसंख्यकों की बड़ी आबादी वाले राज्यों जैसे राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब में उनकी आवाज दबी हुई है. कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अधिवक्ता सनोबर अली कुरैशी ने सवाल उठाया कि देश में इतने संसाधनों के बावजूद पच्चासी प्रतिशत जनता विकास से वंचित क्यों है? लोकसभा टीवी के पत्रकार वीर भूषण ने ओबीसी के लोगों को आगाह करते हुए कहा कि आप मंडल आन्दोलन के समय भी लड़ाई में भाग नहीं लिया और अब जब आरक्षण आप से छिना जा रहा है, तब भी आप लड़ने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. और ना ही आप अपना मेसेंजर लेखक, कवि, नाटककार, पत्रकार पैदा कर पा रहे हैं. 


पत्रकार डॉ. गीता गंगोत्री ने महिलाओं की नगण्य उपस्थिति पर सवाल उठाया. चर्चित उपन्यासकार कपिल ईसापुरी ने अपना अनुभव सुनाते हुए कहा कि अब तक हमलोग टुकड़ों-टुकड़ों में लड़ते रहे हैं और हारते रहे हैं. हमें मिलजुल कर लड़ने की जरूरत है. कार्यक्रम के मुख्य मांग का समर्थन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अरूण कुमार ने मांग की कि बी पी मंडल साहब को भारतरत्न मिलना चाहिए. पीआईएल फाउंडेशन के पदाधिकारिओं का ध्यान उन्होंने इस ओर आकर्षित किया. वरिष्ठ पत्रकार शीबा असलम ने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ कर हमें अपने महापुरुषों से अगल-थलग किया गया है. और अब लोकत्रंत में तो लोगों की हिम्मत नहीं रही कि वे कोई सवाल भी पूछ सकें. बहुसंख्यक पहलवान सोया हुआ है. उसको पता ही नहीं है कि उसका अंग-भंग किया जा चुका है. इसके आगे उन्होंने कहा कि हिन्दू दलित-पिछड़ों से मुसलमान दलित-पिछड़ों को मरवाया जाता है. ये धर्म तो समय-समय पर बदलते रहे हैं. कभी हम जैन थे, कभी बौद्ध और अब मुसलमान. लेकिन हम हैं वही इंसान. 


कार्यक्रम के शीर्षक की ओर ध्यान दिलाते हुए वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमडिया ने कहा कि अब बहुसंख्यक के नाम पर लोगों को एकजूट करना मुस्किल है. लोग जागरूक हो चुके हैं. जब तक उनका अपना सरोकार नहीं होगा, वे नहीं जुड़ेंगे. सामाजिक न्याय के नाम पर आप जाति की लड़ाई लड़ने लगते हैं. देश के वर्तमान हालात पर गम्भीर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मुफ्त में गणेश की मूर्ति बांटी जा रही है. आपकी चेतना को ही खत्म किया जा रहा है. आप अपनी चेतना को भी नहीं बचा पाएँगे. केवल और केवल आरक्षण पर बात करने से बात नहीं बनेगी. वहीं अधिवक्ता पीके यादव ने कहा की अंग्रेजों से ज्यादा अत्याचार ब्राह्मणों ने किया है. 



कार्यक्रम के गेस्ट ऑफ़ ऑनर राज्य सभा एमपी अली अनवर ने कहा की बीपी मंडल साहब का जन्मदिन केवल रश्मि तौर पर न मनाया जाए, बल्कि उनका जो विजन था, उसे भी व्यवहार में लाया जाए. मंडल साहब के साथ भी न्याय नहीं हुआ. उनको भी एक दायरे में बांध दिया गया. मंडल रिपोर्ट में तो मुसलमान भी शामिल थे. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि एक दिल के टुकड़े हजार हुए कोई यहाँ गिरा कोई वहां गिरा. बहुसंख्यकों का यही हाल है. हम मुसलमान इस देश के मूल निवासी हैं. धर्म के प्रति अंधभक्ति हिन्दू और मुस्लिम दलित-पिछड़ों दोनों में है. वहीं राजनीती में वैचारिक झरन हुआ है. हम बहुसंख्यक की बात करें, लेकिन इसका नशा भी नहीं होना चाहिए. आँख मूंद कर किसी का समर्थन मत कीजिए. आँख खोलकर कटु आलोचना हमारी भी किजिए. 


कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायमूर्ति रविन्द्र सिंह ने बीपी मंडल को याद करते हुए कहा कि उनके पिता रासबिहारी लाल मंडल ने अपनी जमींदारी को त्याग कर अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी. उनमें उनके पिता का संस्कार था और उन्होंने अपने इस धर्म का पालन आजीवन किया. जब इंदरा गाँधी ने उन्हें राज्यपाल पद का लोभ दिया, तो उन्होंने लेने से साफ इंकार कर दिया. हम लोक सभा व विधान सभा में चाहे जितना शोर मचा लें, मार्च कर लें, लेकिन यदि हम कार्यपालिका में नहीं होंगे, तब हम कुछ नहीं कर पाएँगे. न्यायपालिका में तो हमारे लिए कोई जगह ही नहीं है. यदि आप अभी मुट्ठी नहीं बाँधेंगे, तो आप की एक-एक अंगुली तोड़ दी जाएगी. 

पीआईएल फाउंडेशन के पदाधिकारी संतोष कुमार, रवि कुमार, गौरव यादव, राजू रंजन, शमशाद आलम और इस संगठन से जुड़े अन्य अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बीपी मंडल के जन्मदिन २५ अगस्त को सामाजिक न्याय दिवस घोषित करने की मांग की. यह कार्यक्रम गाँधी शांति प्रतिष्ठान, आईटीओ के पास आयोजित की गई थी. रवि कुमार ने सभी उपस्थित-अनुपस्थित साथियों को कार्यक्रम में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया.



-संतोष कुमार 
 अध्यक्ष, पीआईएल फाउंडेशन 
 अधिवक्ता, उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली 
 मो. 8459665684 


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   -संपादक