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संजय गाँधी की माँ ने इमरजेंसी लगाई और नेहरू की बेटी ने इमरजेंसी हटाई : जयराम रमेश


 पुस्‍तक विमोचन समारोह 
प्रकृति उन्ही की रक्षा करती है जो प्रकृति की रक्षा करते हैं : इंदिरा गाँधी 

नई दिल्ली : जागरण वार्तालाप शृंखला की पहली कड़ी में आज रेडिसन ब्लू होटल में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद जयराम रमेश ने अपनी नई पुस्तक 'इंदिरा गाँधी अ लाइफ इन नेचरपर  वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय से बातचीत की, जागरण वार्तालाप को 10 अन्य शहरों में भी आयोजित किया जा रहा है.

जयराम रमेश ने इंदिरा गाँधी पर बात करते हुए कहा, "हमारे देश वाले प्रकृति की पूजा करते हैं, पर्यावरण संरक्षण हमारे जीवन में है और सिर्फ भारतीय संस्कृति में है बाकी किसी देश और सभ्यता में कुदरत के प्रति इतना लगाव नहीं है. ये इंदिरा गाँधी के अपने देश के लोगों के प्रति विचार थे.

यह वर्ष इंदिरा गाँधी का जन्म शताब्दी अवसर है और मेरी यह किताब इस उपलक्ष में हैआगे उन्होंने कहा हम इंदिरा गाँधी को या तो दुर्गा के रूप में जानते है और या फिर एमेजेन्सी के लिए याद करते हैंमगर बहुत कम लोग जानते हैं कि इंदिरा गाँधी पर्यावरण के प्रति भी बहुत सवेदनशील थी, और 'इंदिरा गाँधी 'अ लाइफ इन नेचर' पुस्तक उनके प्रकृति प्रेमी और कुदरत के प्रति उनके लगाव को उजागर करता है.
 

2009 से 2011 के 26 महीने के मेरे पर्यावरण मंत्री पद पर रहते हुए मुझे पता चला की इंदिरा गाँधी कुदरत के प्रति काफी सवेदनशील थी. 1925 से 1940 के बीच में इंदिरा गाँधी ने अपने पिता पंडित नेहरू को लगभग 250 पत्र लिखे थे और इन पत्रों में अधिकतर उन्होंने पेड़ पक्षीजंगल इन्हीं का जिक्र किया है.

अनंत विजय से बात करते हुए जयराम रमेश ने आगे बताया की इंदिरा गाँधी राजनीती में जिस तरह तानाशाही से निर्णय लेती थी इसी के विपरीत उन्होंने अपने 16 वर्ष के प्रधानमंत्री कार्यकाल में अपने मुख्यमंत्रियों से पर्यावरण संरक्षण के लड़ती रही ऐसे उन्हें दस्तवेजों से प्राप्त हुआ. उत्तरखंड के चिपको आंदोलन से उनपर बहुत प्रभाव पड़ा और उत्तरखंड में टेहरी बांध परियोजना को उन्होंने वर्षों तक रोका और यह परियोजना उनके मृत्यु के बाद ही शुरू हुई थी.

अनंत विजय के एक सवाल के जवाब में जयराम रमेश ने कहा की इंदिरा गाँधी के 2 फैसलों से वे असहमत थे। मथुरा रेफाइनरी और ओडिशा चिल्का पर नेवी ट्रेनिंग सेंटर को मंजूरी. इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के तहत मैं इंदिरा गाँधी के नक़्शे कदम पर चला इसलिए मेरा कार्यकाल २६ महीने रहानहीं तो मै भी साल मंत्री रहता.

 रिपोर्ट : संतोष कुमार 


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